मेरे विचार में, उच्चतम ज्ञान का अधिकारी भी वही हो सकता है जो सत्य की लिए सत्ता को चुनौती देने का सामर्थ्य रखता है वह जो यह नहीं कर सकता वो तो उच्च ज्ञान का अधिकारी ही नहीं है
हर वक्त कई चीज़ें करने का मन करता है। हर वक्त कुछ नहीं करने का मन करता है। ज़िंदगी के प्रति एक गंभीर इंसान हूं। पर खुद के प्रति गंभीर नहीं हूं। लिखने को मैं गंभीर विषय नहीं मानता हूं। तब बोलने को भी साहित्य की तरह गंभीर विषय की मान्यता देनी होगी। इसलिए मैं बोलने को लिखने से ज़्यादा महत्वपूर्ण मानता हूं । इस ब्लाग में जो कुछ भी लिखता हूं वो मेरे व्यक्तिगत विचार है । यहां लिखी गई बातों को मेरे काम से जोड़ कर न देखा जाए । वैसे यह बहुत मुश्किल काम है ।
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